ENT डॉक्टर बच्चे के कान की जाँच करते हुए, पीछे बुजुर्ग की सुनने की जाँच, वाराणसी में निःशुल्क सुनने की जाँच शिविर

बच्चों में सुनने की समस्या अक्सर वर्षों तक पहचान में नहीं आती, और बड़ों में इसे उम्र का सामान्य असर मानकर छोड़ दिया जाता है। दोनों ही स्थितियों में नुकसान धीरे धीरे बढ़ता रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्कृति हॉस्पिटल, लंका, वाराणसी द्वारा रविवार, 27 सितंबर 2026 को निःशुल्क ENT एवं कॉक्लियर इंप्लांट जाँच शिविर आयोजित किया जा रहा है, जो सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा।

इस लेख में यह समझाया गया है कि सुनने की कमी के संकेत किस उम्र में कैसे दिखते हैं, जाँच किन तरीकों से होती है, और किन मामलों में हियरिंग एड पर्याप्त होती है तथा किनमें कॉक्लियर इंप्लांट की आवश्यकता पड़ती है।

सुनने की समस्या कितनी आम है

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग डेढ़ अरब लोग किसी न किसी स्तर की सुनने की कमी के साथ जी रहे हैं, और इनमें से लगभग अस्सी प्रतिशत निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। संगठन का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर लगभग ढाई अरब तक पहुँच सकती है।

भारत जैसे देश में इस आँकड़े का व्यावहारिक अर्थ यह है कि हर मोहल्ले में ऐसे लोग मौजूद हैं जिनकी सुनने की क्षमता प्रभावित है, लेकिन जिनकी कभी जाँच नहीं हुई।

बच्चों में सुनने की कमी के संकेत

छोटे बच्चे यह नहीं बता पाते कि उन्हें सुनाई नहीं दे रहा। इसलिए माता पिता को व्यवहार से अंदाजा लगाना पड़ता है। उम्र के हिसाब से ये संकेत ध्यान देने योग्य हैं:

  • नवजात एवं छह माह तक: तेज आवाज पर चौंकना नहीं, आवाज की दिशा में सिर न घुमाना
  • छह माह से एक वर्ष: नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, बबलाना बंद कर देना
  • एक से दो वर्ष: सामान्य शब्द बोलना शुरू न करना, इशारों पर अधिक निर्भर रहना
  • दो से चार वर्ष: स्पष्ट न बोलना, टीवी की आवाज बहुत तेज करना, बार बार पूछना
  • स्कूल जाने की उम्र: कक्षा में ध्यान न देना, पढ़ाई में पिछड़ना, बात समझने में देरी

इनमें से कई संकेत ऐसे हैं जिन्हें स्वभाव या शरारत समझ लिया जाता है। यदि बच्चा बार बार पूछता है या टीवी की आवाज तेज रखता है, तो यह आदत नहीं, जाँच का कारण है।

बड़ों में सुनने की कमी के संकेत

वयस्कों में कमी धीरे धीरे आती है, इसलिए व्यक्ति स्वयं इसे देर से महसूस करता है। अक्सर घरवाले पहले नोटिस करते हैं।

  • भीड़ या शोर में बातचीत समझने में कठिनाई
  • फोन पर बात करते समय एक ही कान का प्रयोग करना
  • टीवी की आवाज दूसरों की तुलना में तेज रखना
  • बार बार दोहराने के लिए कहना
  • कान में सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देना
  • कान से पानी या मवाद आना

कान से लगातार स्राव आना एक अलग स्थिति है जिसे टालना नहीं चाहिए, क्योंकि यह अक्सर पर्दे में छेद या पुराने संक्रमण का संकेत होता है। कान बहने के कारण और इलाज पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

सुनने की जाँच कैसे की जाती है

सुनने की जाँच दर्दरहित होती है और अधिकतर मामलों में एक ही विज़िट में पूरी हो जाती है। जाँच का चुनाव उम्र और सहयोग की क्षमता पर निर्भर करता है।

प्योर टोन ऑडियोमेट्री (PTA)

इसमें हेडफोन के माध्यम से अलग अलग आवृत्ति की आवाजें सुनाई जाती हैं और व्यक्ति संकेत देता है कि आवाज सुनाई दी या नहीं। इससे यह पता चलता है कि कमी किस स्तर की है और किस आवृत्ति पर अधिक है।

इम्पीडेंस ऑडियोमेट्री

यह जाँच बीच के कान की स्थिति बताती है, जैसे पर्दे की गतिशीलता और कान में तरल जमा होना। बच्चों में यह विशेष रूप से उपयोगी है।

OAE और BERA

ये दोनों जाँचें उन बच्चों के लिए हैं जो प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं होते। OAE भीतरी कान की कार्यप्रणाली जाँचती है, और BERA सुनने की नस से मस्तिष्क तक पहुँचने वाले संकेतों को मापती है। दोनों में बच्चे के सहयोग की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए नवजात शिशुओं में भी की जा सकती हैं। अस्पताल में ये सभी जाँचें ऑडियोलॉजी एवं एंडोस्कोपी विभाग में उपलब्ध हैं।

सुनने की कमी के सामान्य कारण

इलाज की दिशा तय करने के लिए कारण जानना आवश्यक है, क्योंकि कुछ कारण पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और कुछ में केवल आगे का नुकसान रोका जा सकता है।

  • कान में मैल का जमाव, जो सफाई के बाद तुरंत ठीक हो जाता है
  • बीच के कान का संक्रमण और पर्दे में छेद, जिसमें दवा या सर्जरी से सुधार संभव है
  • बचपन के बार बार होने वाले कान के संक्रमण
  • तेज आवाज का लंबा संपर्क, जैसे हेडफोन, मशीनें, जनरेटर और लाउडस्पीकर
  • उम्र के साथ भीतरी कान की कोशिकाओं का क्षय
  • कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव
  • जन्मजात कारण अथवा गर्भावस्था के दौरान हुआ संक्रमण

इनमें से पहले तीन कारण ऐसे हैं जिनमें समय पर इलाज से सुनने की क्षमता वापस आ सकती है। यही वजह है कि जाँच में देरी सबसे महँगी पड़ती है, क्योंकि जो स्थिति शुरुआत में ठीक हो सकती थी, वह बाद में स्थायी हो जाती है।

हियरिंग एड किसके लिए, कॉक्लियर इंप्लांट किसके लिए

यह सबसे आम प्रश्न है, और इसका उत्तर कमी के स्तर पर निर्भर करता है।

हियरिंग एड क्या करती है? यह एक बाहरी उपकरण है जो आने वाली आवाज को तेज करके कान तक पहुँचाता है। जिन लोगों में हल्की या मध्यम स्तर की कमी है और भीतरी कान की कार्यप्रणाली ठीक है, उनके लिए यह पर्याप्त होती है। हियरिंग एड का चुनाव जाँच रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।

कॉक्लियर इंप्लांट क्या करता है? यह सर्जरी द्वारा लगाया जाने वाला उपकरण है जो क्षतिग्रस्त भीतरी कान को बायपास करते हुए सीधे सुनने की नस तक विद्युत संकेत पहुँचाता है। जब कमी गंभीर या अति गंभीर स्तर की हो और हियरिंग एड से लाभ न मिले, तब इंप्लांट पर विचार किया जाता है।

बच्चों के मामले में समय सबसे महत्वपूर्ण कारक है। भाषा सीखने की अवधि सीमित होती है, और जितनी जल्दी सुनाई देना शुरू होता है, बोलने की क्षमता उतनी बेहतर विकसित होती है। सुनने की कमी से जुड़ी विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर दी गई है।

शिविर में क्या होगा

27 सितंबर के शिविर में ENT परामर्श, कान की जाँच, सुनने की जाँच और कॉक्लियर इंप्लांट स्क्रीनिंग निःशुल्क उपलब्ध रहेगी। इसके साथ रक्त शर्करा की जाँच भी की जाएगी, क्योंकि अनियंत्रित मधुमेह कान के संक्रमण को गंभीर बना सकता है।

  • तारीख: रविवार, 27 सितंबर 2026
  • समय: सुबह 10:00 से दोपहर 2:00 बजे
  • स्थान: सत्कृति हॉस्पिटल, संकट मोचन, लंका, वाराणसी
  • पंजीकरण: 8765848001 या 9454219800

शिविर में अस्पताल के ENT विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे, जिनमें डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, डॉ. अभिनीत जैन और डॉ. अंकित ओझा शामिल हैं। जिन मरीजों को आगे इलाज की आवश्यकता होगी, उन्हें आयुष्मान भारत योजना की पात्रता के बारे में भी बताया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चे की पहली सुनने की जाँच कब करानी चाहिए?

आदर्श रूप से जन्म के कुछ सप्ताह के भीतर। यदि यह नहीं हो सका, तो जैसे ही कोई संदेह हो, जाँच करा लेनी चाहिए। OAE और BERA नवजात शिशुओं में भी संभव हैं।

क्या सुनने की जाँच में दर्द होता है?

नहीं। सभी जाँचें दर्दरहित होती हैं। बच्चों में BERA के दौरान बच्चे का शांत या सोया होना आवश्यक होता है, इसके अलावा कोई कष्ट नहीं होता।

क्या एक कान की कमी को नजरअंदाज किया जा सकता है?

नहीं। एक कान से कम सुनाई देने पर दिशा पहचानने और शोर में बात समझने की क्षमता प्रभावित होती है। बच्चों में यह पढ़ाई पर असर डालती है, इसलिए जाँच आवश्यक है।

क्या कान में लगातार सीटी बजना गंभीर है?

यह टिनिटस कहलाता है और अपने आप में बीमारी नहीं, संकेत है। यदि यह एक ही कान में हो, अचानक शुरू हुआ हो या साथ में सुनाई कम दे, तो जाँच करानी चाहिए।

चक्कर आने का सुनने से क्या संबंध है?

संतुलन का तंत्र भीतरी कान में ही होता है, इसलिए कई बार दोनों समस्याएँ साथ आती हैं। ऐसे मामलों में चक्कर का प्रबंधन अलग से किया जाता है।

निष्कर्ष

सुनने की कमी का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह चुपचाप बढ़ती है। बच्चों में यह भाषा और पढ़ाई को प्रभावित करती है, और बड़ों में यह धीरे धीरे बातचीत और सामाजिक जुड़ाव को कम कर देती है। दोनों स्थितियों में जाँच ही पहला कदम है।

यदि घर में किसी बच्चे के बोलने में देरी हो रही है या किसी बुजुर्ग को बार बार दोहराकर बताना पड़ता है, तो 27 सितंबर को एक बार जाँच अवश्य करा लें। पंजीकरण के लिए 8765848001 पर कॉल करें या ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *