चक्कर से परेशान महिला, कान के अंदर BPPV के कण दिखाता चित्र और Epley मैन्युवर करते ENT डॉक्टर - वर्टिगो का इलाज, सत्कृति हॉस्पिटल वाराणसी

सुबह उठने के लिए करवट ली और अचानक पूरा कमरा घूमने लगा। कुछ सेकंड में सब ठीक हो गया, लेकिन फिर सिर घुमाते ही वही हाल। हमारी ENT OPD में ऐसे मरीज लगभग रोज आते हैं, और ज्यादातर पहले से कई दिन “चक्कर की गोली” खा चुके होते हैं। वर्टिगो यानी चक्कर आना अपने आप में बीमारी नहीं है, यह किसी और दिक्कत का इशारा है। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह कान के अंदर होती है, कभी दिमाग में, और कभी BP, शुगर या खून की कमी में।

इस लेख में जानिए वर्टिगो क्या है, BPPV और मेनियर रोग कैसे पहचानें, कब तुरंत इमरजेंसी जाएं, जांच कैसे होती है, VRT थेरेपी क्या है, और वाराणसी में इलाज का खर्च कितना है।

वर्टिगो क्या है और यह आम चक्कर से अलग कैसे है?

वर्टिगो में ऐसा लगता है कि आप खुद या आपके आसपास की चीजें घूम रही हैं, जबकि असल में कुछ भी नहीं हिल रहा होता। हमारे कान के अंदर पानी जैसे द्रव से भरी तीन छोटी नलियां होती हैं, जो सिर के हिलने की खबर दिमाग तक पहुंचाती हैं। जब एक कान से आने वाला सिग्नल दूसरे कान से मेल नहीं खाता, तो दिमाग उलझ जाता है और चक्कर आने लगता है।

मरीज “चक्कर” शब्द तीन अलग-अलग परेशानियों के लिए बोलते हैं, और डॉक्टर के लिए यह फर्क बहुत काम का है:

  • सब कुछ घूमता हुआ लगना: यही असली वर्टिगो है, और ज्यादातर इसकी वजह कान का बैलेंस वाला हिस्सा होता है।
  • सिर हल्का लगना या आंखों के आगे अंधेरा छाना: यह अक्सर BP गिरने, शुगर कम होने, खून की कमी या पानी की कमी से होता है।
  • चलते समय लड़खड़ाना या पैर ठीक से न टिकना: यह बैलेंस की कमजोरी है, जो नसों, आंखों या दिमाग से जुड़ी हो सकती है।

वर्टिगो की मुख्य वजहें

BPPV: कान के अंदर छोटे कणों का खिसकना

BPPV (Benign Paroxysmal Positional Vertigo) चक्कर आने की सबसे आम वजह है। बढ़ती उम्र, सिर पर चोट, लंबे समय बिस्तर पर रहने या कभी बिना किसी वजह के कान के अंदर के कैल्शियम के छोटे कण खिसक कर नली में चले जाते हैं। फिर जब भी सिर एक खास पोजीशन में जाता है, ये कण हिलते हैं और तेज चक्कर आता है।

BPPV की पहचान यह है कि चक्कर करवट लेने, लेटने, ऊपर देखने या नीचे झुकने पर आता है और आमतौर पर एक मिनट से कम रहता है। इसमें सुनाई कम नहीं होता। अच्छी बात यह है कि इसका इलाज ज्यादातर बिना दवा के, OPD में ही हो जाता है।

मेनियर रोग (Meniere’s Disease)

मेनियर रोग में कान के अंदर द्रव का दबाव बढ़ जाता है। इसमें चक्कर अचानक आता है और 20 मिनट से लेकर कई घंटों तक रहता है। साथ में एक कान भारी लगता है, कान में सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज आती है (टिनिटस), और सुनाई कम हो जाता है। शुरू में चक्कर रुकने के बाद सुनाई वापस ठीक हो जाता है, लेकिन बार-बार अटैक आने पर सुनाई हमेशा के लिए कम हो सकता है। यह ज्यादातर 40 से 60 साल की उम्र में देखा जाता है।

वेस्टिबुलर न्यूराइटिस और लेबिरिंथाइटिस

अक्सर सर्दी-जुकाम या वायरल बुखार के कुछ दिन बाद कान की बैलेंस वाली नस में सूजन आ जाती है। इसमें चक्कर अचानक शुरू होता है, एक से तीन दिन तक लगातार तेज रहता है, उल्टी होती है और मरीज बिस्तर से उठ नहीं पाता। सुनाई ठीक हो तो इसे न्यूराइटिस कहते हैं, सुनाई भी कम हो जाए तो लेबिरिंथाइटिस। हल्का डगमगाना कई हफ्ते रह सकता है।

वेस्टिबुलर माइग्रेन

जिन लोगों को माइग्रेन की शिकायत रही है, उन्हें चक्कर के अटैक भी आ सकते हैं, कभी सिरदर्द के साथ और कभी बिना सिरदर्द के। तेज रोशनी या शोर से परेशानी होना, और नींद पूरी न होने या भूखे रहने पर चक्कर बढ़ जाना इसकी पहचान है।

कान के अलावा दूसरी वजहें

BP की दवा बदलने के बाद खड़े होते ही चक्कर, डायबिटीज में शुगर कम होने पर पसीने के साथ चक्कर, खून की कमी, पानी की कमी और कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट भी आम वजहें हैं।

OPD में हम अक्सर देखते हैं कि लोग अपने चक्कर को “सर्वाइकल” समझकर महीनों गर्दन का पट्टा पहनते रहते हैं। गर्दन की दिक्कत से चक्कर आ सकता है, लेकिन ऐसा उतना ज्यादा नहीं होता जितना लोग मानते हैं। करवट लेने पर आने वाला चक्कर ज्यादातर BPPV होता है, और उसका इलाज बिल्कुल अलग है।

वर्टिगो के लक्षण: कितनी देर चक्कर आता है, इससे वजह का अंदाजा

चक्कर कितनी देर रहता है और कब आता है, इससे वजह का अंदाजा लग जाता है। साथ में जी मिचलाना, उल्टी, पसीना और आंखों का अपने आप हिलना (nystagmus) भी आम है:

  • कुछ सेकंड, सिर की पोजीशन बदलने पर: ज्यादातर BPPV।
  • 20 मिनट से कुछ घंटे, कान भारी लगे, सीटी बजे और सुनाई कम हो: मेनियर रोग।
  • लगातार एक से तीन दिन, तेज उल्टी के साथ, पर सुनाई ठीक: वेस्टिबुलर न्यूराइटिस।
  • सिरदर्द के साथ, रोशनी या शोर से परेशानी: वेस्टिबुलर माइग्रेन।
  • खड़े होते ही आंखों के आगे अंधेरा: BP या पानी की कमी।

इन लक्षणों में तुरंत इमरजेंसी जाएं

ज्यादातर चक्कर खतरनाक नहीं होते, लेकिन कभी-कभी यह ब्रेन स्ट्रोक (लकवे) का पहला इशारा होता है। चक्कर के साथ इनमें से कोई परेशानी हो तो सीधे इमरजेंसी जाएं:

  • एक चीज के दो दिखना या अचानक धुंधला दिखना
  • बोलने में लड़खड़ाहट या शब्द ठीक से न निकलना
  • चेहरे का एक तरफ टेढ़ा हो जाना
  • हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन
  • सहारे के बिना खड़ा न हो पाना
  • अचानक बहुत तेज सिरदर्द, जैसा पहले कभी न हुआ हो
  • सिर पर चोट लगने के बाद चक्कर

60 साल से ज्यादा उम्र में, या जिन्हें BP, शुगर या दिल की बीमारी है, उनमें पहली बार आए तेज चक्कर को हल्के में न लें।

सत्कृति हॉस्पिटल में वर्टिगो की जांच कैसे होती है?

जांच का सबसे बड़ा हिस्सा डॉक्टर से बातचीत है: चक्कर कब शुरू हुआ, कितनी देर रहता है, किस बात से आता है, कान में आवाज या भारीपन है या नहीं, और कौन सी दवाएं चल रही हैं। दिखाने आने से पहले यह कागज पर लिख लें कि चक्कर कब-कब और किस हालत में आया।

इसके बाद जरूरत के हिसाब से ये टेस्ट किए जाते हैं:

  • पोजीशनल टेस्ट (Dix-Hallpike और रोल टेस्ट): खास तरीके से लिटाकर आंखों की हरकत देखी जाती है। इसी से पक्का होता है कि BPPV है या नहीं, और कण किस नली में हैं।
  • VNG टेस्ट (Videonystagmography): कैमरे वाले खास चश्मे से आंखों की हरकत रिकॉर्ड की जाती है, जिससे पता चलता है कि दिक्कत किस कान में है।
  • सुनने की जांच (ऑडियोमेट्री): मेनियर रोग या लेबिरिंथाइटिस का शक हो तो।
  • BP और शुगर की जांच: खासकर बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में।
  • MRI: सिर्फ तब, जब लक्षण दिमाग की किसी दिक्कत की ओर इशारा करें या इलाज से फायदा न हो। हर चक्कर में MRI जरूरी नहीं है।

सत्कृति हॉस्पिटल में वर्टिगो की जांच और इलाज के लिए VNG और पोजीशनल टेस्ट की सुविधा है, और सुनने की जांच हमारी ऑडियोलॉजी यूनिट में होती है।

वर्टिगो का इलाज

BPPV का इलाज: Epley मैन्युवर

BPPV में दवा से ज्यादा काम आता है Epley मैन्युवर। इसमें डॉक्टर सिर को एक तय क्रम में अलग-अलग पोजीशन में घुमाते हैं, ताकि खिसके हुए कण वापस अपनी जगह पर पहुंच जाएं। इसमें 10 से 15 मिनट लगते हैं और ज्यादातर मरीजों को एक या दो बार में ही आराम मिल जाता है। यह सही कान और सही नली के हिसाब से होना चाहिए; इंटरनेट पर वीडियो देखकर गलत तरफ करने से चक्कर बढ़ सकता है।

मेनियर रोग का इलाज

मेनियर रोग में मकसद होता है चक्कर के अटैक कम करना और सुनाई को बचाना। सबसे पहला कदम है खाने में नमक कम करना, यानी अचार, पापड़, नमकीन और पैकेट वाली चीजें कम खाना। चाय-कॉफी कम करना और नींद पूरी लेना भी फायदा देता है। डॉक्टर की सलाह से दवाएं दी जाती हैं, और अगर दवा से अटैक न रुकें तो कान के पर्दे के पीछे इंजेक्शन (intratympanic injection) का ऑप्शन होता है। ऑपरेशन की जरूरत बहुत कम मरीजों को पड़ती है।

वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT) क्या है?

VRT एक्सरसाइज से होने वाला इलाज है, जो दिमाग को कान की बैलेंस वाली कमी के साथ एडजस्ट करना सिखाता है। न्यूराइटिस के बाद का डगमगाना, बुजुर्गों का लड़खड़ाना और पुराना हल्का चक्कर, इन सब में यह बहुत असरदार है। इसमें तीन तरह की एक्सरसाइज होती हैं:

  • नजर टिकाने वाली एक्सरसाइज: सामने किसी चीज पर नजर टिकाकर सिर को धीरे-धीरे दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाना।
  • बैलेंस वाली एक्सरसाइज: पैर पास-पास रखकर खड़े होना और एक पैर के ठीक आगे दूसरा पैर रखकर सीधी लाइन में चलना, पहले आंखें खोलकर और फिर दीवार के पास आंखें बंद करके।
  • आदत डालने वाली एक्सरसाइज: जिन हरकतों से चक्कर आता है, उन्हें थोड़ा-थोड़ा करके दोहराना, ताकि दिमाग को उनकी आदत पड़ जाए।

रोज एक्सरसाइज करने पर आमतौर पर 6 से 8 हफ्तों में अच्छा फर्क दिखता है। शुरू में इनसे हल्का चक्कर आना नॉर्मल है, इसलिए इन्हें पहले डॉक्टर से सीखें और किसी सुरक्षित जगह पर करें।

चक्कर की दवा: कितने दिन लें?

तेज चक्कर और उल्टी में दी जाने वाली दवाएं कुछ दिनों के आराम के लिए ठीक हैं, लेकिन बहुत से मरीज इन्हें बिना जांच के महीनों तक खाते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसी दवा लेने से दिमाग को खुद बैलेंस वापस पाने में ज्यादा समय लगता है, और बुजुर्गों में सुस्ती और गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

वर्टिगो के इलाज में कितना खर्च आता है?

खर्च चक्कर की वजह और जरूरी टेस्ट पर निर्भर करता है। ज्यादातर मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है। वाराणसी के प्राइवेट अस्पतालों में अंदाज़न खर्च कुछ इस तरह आता है:

  • डॉक्टर की फीस, पोजीशनल टेस्ट और Epley मैन्युवर: आमतौर पर OPD में ही, अलग से बड़ा खर्च नहीं।
  • VNG टेस्ट: लगभग 2,500 से 6,000 रुपये।
  • सुनने की जांच (ऑडियोमेट्री): लगभग 500 से 1,500 रुपये।
  • MRI (जरूरत होने पर): लगभग 5,000 से 10,000 रुपये।
  • VRT: कुछ सेशन में सीखने के बाद ज्यादातर एक्सरसाइज घर पर होती हैं।
  • मेनियर रोग में कान का इंजेक्शन: लगभग 3,000 से 10,000 रुपये एक इंजेक्शन का।

ये सिर्फ अंदाज़न आंकड़े हैं; आपको कौन सा टेस्ट चाहिए और असल खर्च कितना होगा, यह डॉक्टर के देखने के बाद ही तय होता है। सत्कृति हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत कार्ड भर्ती वाले ENT इलाज में चलता है, OPD जांच में नहीं; कार्ड से जुड़ी जानकारी आयुष्मान भारत पेज पर है।

वर्टिगो होने पर घर पर क्या करें और क्या न करें

  • चक्कर शुरू होते ही बैठ जाएं या लेट जाएं, और सिर को झटके से न घुमाएं।
  • चक्कर रहते हुए गाड़ी या बाइक न चलाएं, सीढ़ी या छत पर न चढ़ें।
  • तेज चक्कर कम होने के बाद पूरे दिन बिस्तर पर न पड़े रहें; धीरे-धीरे चलना-फिरना जल्दी ठीक होने में मदद करता है।
  • डायबिटीज के मरीज चक्कर आने पर शुगर चेक कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वर्टिगो पूरी तरह ठीक हो सकता है?

ज्यादातर मामलों में हां। BPPV अक्सर एक-दो मैन्युवर में ठीक हो जाता है, और न्यूराइटिस कुछ हफ्तों में, खासकर VRT के साथ। मेनियर रोग पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन सही इलाज से अटैक काफी कम हो जाते हैं।

BPPV दोबारा क्यों हो जाता है?

कान के कण फिर से खिसक सकते हैं, खासकर बढ़ती उम्र में या सिर पर चोट के बाद। दोबारा होने पर भी वही मैन्युवर उतना ही काम करता है।

चक्कर के लिए ENT डॉक्टर को दिखाएं या न्यूरोलॉजिस्ट को?

अगर चक्कर करवट लेने पर आता है, या साथ में कान में आवाज, भारीपन या सुनाई कम होना है, तो पहले ENT डॉक्टर को दिखाएं। अगर साथ में बोलने में दिक्कत, कमजोरी या एक चीज के दो दिखना है, तो यह इमरजेंसी है।

क्या डायबिटीज के मरीजों को चक्कर ज्यादा आते हैं?

हां, शुगर कम होने, BP की दवाओं और पैरों की नसें कमजोर होने की वजह से इन्हें चक्कर और डगमगाने की शिकायत ज्यादा होती है। ऐसे मरीजों में कान की जांच के साथ शुगर कंट्रोल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

वाराणसी में वर्टिगो का इलाज: आगे क्या करें

बार-बार चक्कर के डर से लोग अकेले बाहर जाना और गाड़ी चलाना तक छोड़ देते हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में वजह पकड़ में आ जाती है और इलाज आसान होता है। महीनों तक चक्कर की गोली खाने से अच्छा है कि एक बार पूरी जांच करवा लें।

सत्कृति हॉस्पिटल का पता है B 32/28, B-19, संकट मोचन रोड, साकेत नगर कॉलोनी, लंका, वाराणसी 221005। OPD सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है। जांच के लिए 87658 48001 पर कॉल करें या ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें।

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