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गले में खराश और टॉन्सिल: बच्चों में टॉन्सिल सर्जरी कब जरूरी है? (Satkriti Hospital, Varanasi)

October 30, 2026

गले में खराश और टॉन्सिल: बच्चों में टॉन्सिल सर्जरी कब जरूरी है? (Satkriti Hospital, Varanasi)

बच्चे का गला हर दो महीने में खराब हो जाता है। बुखार आता है, खाना निगलने में दर्द होता है, स्कूल छूट जाता है और एंटीबायोटिक से चार दिन में आराम मिल जाता है। फिर कुछ हफ्ते बाद वही कहानी दोहराई जाती है। ऐसे मामलों में माता पिता का सबसे आम सवाल यही होता है कि टॉन्सिल निकलवाना पड़ेगा या नहीं।

इस सवाल का जवाब "हां" या "ना" में नहीं होता। इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि गला साल में कितनी बार खराब हुआ, हर बार कितना गंभीर था, और बच्चे की रात की नींद और सांस पर इसका क्या असर पड़ रहा है। वाराणसी के लंका स्थित सत्कृति हॉस्पिटल में हम रोज ऐसे बच्चों को देखते हैं, और इस लेख में हम वही तरीका बता रहे हैं जिससे यह फैसला लिया जाता है।

टॉन्सिल क्या होते हैं और इनका काम क्या है?

टॉन्सिल क्या है? टॉन्सिल गले के दोनों तरफ मौजूद मांस जैसी दो गांठें हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा हैं और मुंह या नाक से अंदर जाने वाले कीटाणुओं को पहचानने में मदद करती हैं।

बचपन में ये सबसे ज्यादा सक्रिय रहती हैं, इसलिए बच्चों में इनमें सूजन और संक्रमण भी ज्यादा होता है। उम्र बढ़ने के साथ इनका आकार अपने आप कम होता जाता है और शरीर के बाकी हिस्से इनका काम संभाल लेते हैं। यही कारण है कि बड़ी उम्र में टॉन्सिल की दिक्कत कम देखी जाती है।

इनके पीछे, नाक के पिछले हिस्से में एक और गांठ होती है जिसे एडिनॉइड कहते हैं। बच्चों में अक्सर टॉन्सिल और एडिनॉइड दोनों साथ बढ़े हुए मिलते हैं, इसलिए जांच में दोनों देखे जाते हैं।

टॉन्सिल में संक्रमण क्यों होता है?

ज्यादातर मामलों में गले की खराश वायरस से होती है, वही वायरस जो सर्दी जुकाम करता है। ऐसी खराश तीन से पांच दिन में अपने आप ठीक हो जाती है और इसमें एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती।

कुछ मामलों में संक्रमण बैक्टीरिया से होता है। इसमें आमतौर पर तेज बुखार आता है, टॉन्सिल पर सफेद या पीली परत दिखती है, गर्दन की गांठें सूज जाती हैं और निगलने में काफी दर्द होता है। इसमें डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स जरूरी होता है, क्योंकि अधूरा कोर्स बीमारी को लौटा लाता है।

धूल, धुआं, ठंडी चीजें और एलर्जी सीधे संक्रमण नहीं करतीं, लेकिन गले को संवेदनशील बना देती हैं, जिससे संक्रमण जल्दी पकड़ता है।

ये लक्षण दिखें तो ENT डॉक्टर को दिखाएं

  • बार बार गले में दर्द और बुखार
  • निगलने में तकलीफ या खाना छोड़ देना
  • मुंह से बदबू आना
  • आवाज में भारीपन या बदलाव
  • गर्दन की गांठों में सूजन
  • रात में तेज खर्राटे
  • सोते समय सांस कुछ पल के लिए रुक जाना, फिर जोर से सांस लेना
  • मुंह खोलकर सोना और सुबह थका हुआ उठना
  • बिना वजह वजन न बढ़ना या पढ़ाई में मन न लगना

इसमें सबसे ज्यादा नजरअंदाज किया जाने वाला लक्षण खर्राटा है। माता पिता इसे सामान्य समझ लेते हैं, लेकिन बच्चे का तेज खर्राटा लेना और नींद में सांस रुकना एक असल दिक्कत का संकेत है। ऐसी अधूरी नींद का असर उसकी पढ़ाई, व्यवहार और शारीरिक विकास पर पड़ता है।

बच्चों में टॉन्सिल सर्जरी कब जरूरी है?

टॉन्सिल सर्जरी कब जरूरी होती है? दुनिया भर में माने जाने वाले ENT दिशानिर्देशों के अनुसार सर्जरी पर विचार दो मुख्य स्थितियों में किया जाता है: जब गले का संक्रमण बार बार लौटता है, और जब बढ़े हुए टॉन्सिल नींद में सांस रोक रहे हों।

1. बार बार लौटने वाला संक्रमण। अंतरराष्ट्रीय ENT दिशानिर्देश (AAO-HNS) में सर्जरी पर विचार करने का पैमाना इस तरह बताया गया है:

  • पिछले एक साल में कम से कम 7 बार संक्रमण, या
  • लगातार 2 साल तक हर साल कम से कम 5 बार, या
  • लगातार 3 साल तक हर साल कम से कम 3 बार

इसके साथ यह भी जरूरी है कि हर बार के संक्रमण के साथ इनमें से कोई एक लक्षण दर्ज हो: 101 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बुखार, गर्दन की गांठों में सूजन, टॉन्सिल पर मवाद जैसी परत, या स्ट्रेप टेस्ट पॉजिटिव आना।

अगर संक्रमण इससे कम बार हो रहा है, तो दिशानिर्देश इंतजार करने और नजर रखने की सलाह देते हैं, सर्जरी की नहीं। इसीलिए हम माता पिता से कहते हैं कि हर बार की पर्ची, दवा और बुखार का रिकॉर्ड संभालकर रखें। यह रिकॉर्ड ही तय करता है कि सर्जरी की जरूरत है या नहीं।

2. नींद में सांस की रुकावट। अगर बढ़े हुए टॉन्सिल और एडिनॉइड सांस का रास्ता रोक रहे हैं और जांच में स्लीप एप्निया पाया जाता है, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। ऐसे मामलों में संक्रमण की गिनती मायने नहीं रखती, सांस की रुकावट खुद एक पर्याप्त कारण है। अध्ययनों के अनुसार सर्जरी के बाद करीब 80 प्रतिशत बच्चों में स्लीप एप्निया की समस्या ठीक हो जाती है।

इनके अलावा सर्जरी इन स्थितियों में भी सोची जाती है:

  • टॉन्सिल के आसपास मवाद भर जाना (एब्सेस) जो दोबारा हो रहा हो
  • एक तरफ का टॉन्सिल असामान्य रूप से बड़ा होना
  • निगलने या बोलने में लगातार दिक्कत
  • एंटीबायोटिक के बार बार कोर्स से बच्चे को होने वाला नुकसान

जांच में क्या होता है

सत्कृति हॉस्पिटल के गला विभाग में जांच इस क्रम में होती है:

पूरा इतिहास। कितनी बार संक्रमण हुआ, हर बार बुखार कितना था, कौन सी दवाएं चलीं, स्कूल कितने दिन छूटा, और रात में खर्राटे या सांस रुकने की शिकायत है या नहीं।

गले और नाक की जांच। टॉन्सिल का आकार और सूजन देखी जाती है। नाक के पिछले हिस्से में एडिनॉइड देखने के लिए एंडोस्कोपी की जाती है, जो कुछ ही मिनट लेती है।

जरूरत पर अन्य जांचें। खून की जांच, और नींद में सांस की दिक्कत होने पर नींद से जुड़ी जांच। कान में असर दिखे तो ऑडियोलॉजी विभाग में सुनने की जांच भी की जाती है, क्योंकि बड़े एडिनॉइड कान में पानी जमा कर सकते हैं।

इन सबके बाद ही तय होता है कि दवा से काम चलेगा, इंतजार करना है, या सर्जरी करनी है।

सर्जरी कैसे होती है

बच्चों में टॉन्सिल की सर्जरी (टॉन्सिलेक्टॉमी) पूरी बेहोशी में होती है और आमतौर पर एक घंटे से कम समय लेती है। चेहरे या गर्दन पर कोई चीरा नहीं लगता, पूरा काम मुंह के रास्ते होता है। जरूरत होने पर एडिनॉइड भी उसी समय निकाल दिए जाते हैं।

सत्कृति हॉस्पिटल वाराणसी का पहला अस्पताल है जहां कोबलेशन तकनीक शुरू की गई। इस तकनीक में कम तापमान पर ऊतक हटाया जाता है, जिससे खून बहुत कम निकलता है, दर्द कम होता है और बच्चा जल्दी सामान्य खाना शुरू कर देता है। एडिनॉइड की कोबलेशन सर्जरी हम दर्द रहित प्रक्रिया के रूप में करते हैं, जो छोटे बच्चों के लिए खास तौर पर उपयोगी है।

सर्जरी से पहले दो बातें जरूरी हैं: बच्चे को उस समय सक्रिय संक्रमण या तेज बुखार न हो, और सर्जरी से पहले लगभग छह घंटे कुछ खाया पिया न हो। बाकी तैयारी डॉक्टर और एनेस्थीसिया टीम बताती है।

सर्जरी के बाद रिकवरी

ज्यादातर बच्चे उसी दिन या अगली सुबह घर जा सकते हैं।

  • पहले 2 से 3 दिन: गले में दर्द सबसे ज्यादा रहता है। ठंडा पानी, आइसक्रीम, कस्टर्ड, दही और ठंडा दूध आराम देते हैं।
  • पहला हफ्ता: नरम और ठंडा खाना दें। खिचड़ी, दलिया, केला, मसले आलू ठीक हैं। मिर्च मसाला, तला भुना, चिप्स और बहुत गरम चीजें न दें।
  • 5 से 7 दिन: गले में सफेद परत दिखना सामान्य है, यह घाव भरने की प्रक्रिया है। इसे संक्रमण समझकर घबराएं नहीं।
  • 7 से 10 दिन: दर्द कम हो जाता है और बच्चा सामान्य खाना शुरू कर देता है। डॉक्टर के कहने पर स्कूल भेजा जा सकता है।
  • दो हफ्ते: दौड़भाग और खेलकूद धीरे धीरे शुरू करें।

पूरे समय पानी और तरल चीजें भरपूर दें। बच्चे दर्द की वजह से पीना कम कर देते हैं, और इससे ही कमजोरी आती है। दवाएं डॉक्टर के बताए समय पर पूरी दें।

तुरंत अस्पताल कब आएं: मुंह से ताजा लाल खून आने पर, तेज बुखार आने पर, पानी तक निगल न पाने पर, या बच्चा बहुत सुस्त पड़ जाने पर देर न करें।

टॉन्सिल निकलवाने के बारे में आम भ्रम

"टॉन्सिल निकल जाएंगे तो रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाएगी।" टॉन्सिल रोग प्रतिरोधक प्रणाली का एक छोटा हिस्सा हैं। शरीर में यही काम करने वाले कई और हिस्से हैं और वे यह जिम्मेदारी संभाल लेते हैं। जो टॉन्सिल खुद बार बार संक्रमित हो रहे हैं, वे सुरक्षा देने के बजाय संक्रमण का अड्डा बन जाते हैं।

"बच्चा बड़ा होकर अपने आप ठीक हो जाएगा।" कई बच्चों में ऐसा होता है, और इसी वजह से कम संक्रमण वाले मामलों में इंतजार किया जाता है। लेकिन जब नींद में सांस रुक रही हो, तो इंतजार करने से बचपन के वे साल निकल जाते हैं जिनमें विकास होना है।

"सर्जरी के बाद आवाज बदल जाएगी।" सामान्य टॉन्सिल सर्जरी से आवाज की गुणवत्ता पर स्थायी असर नहीं पड़ता। जिन बच्चों की आवाज नाक से निकलती थी, उनमें एडिनॉइड हटने के बाद आवाज बेहतर हो जाती है।

आयुष्मान भारत से इलाज

सत्कृति हॉस्पिटल NABH मान्यता प्राप्त है और आयुष्मान भारत (PM-JAY) में सूचीबद्ध है। टॉन्सिल और एडिनॉइड की सर्जरी योजना के तहत हमारे यहां होने वाली सबसे आम बाल ENT सर्जरी में से है।

कार्ड, आधार और पुरानी पर्चियां लेकर हमारे आयुष्मान डेस्क पर आएं। वहां पात्रता जांची जाती है और इलाज शुरू होने से पहले योजना से मंजूरी ली जाती है। जानकारी हमारे आयुष्मान भारत पेज पर भी दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या टॉन्सिल की दवा से ठीक हो सकते हैं?

हां, एक बार का संक्रमण दवा से ठीक हो जाता है। सर्जरी तब सोची जाती है जब संक्रमण बार बार लौटे या टॉन्सिल सांस रोक रहे हों।

सर्जरी के लिए बच्चे की सही उम्र क्या है?

कोई एक तय उम्र नहीं है। फैसला लक्षणों की गंभीरता और बच्चे की सेहत देखकर लिया जाता है। बहुत छोटे बच्चों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है और उन्हें सर्जरी के बाद कुछ समय निगरानी में रखा जाता है।

टॉन्सिल सर्जरी में कितना खर्च आता है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि केवल टॉन्सिल निकाले जा रहे हैं या एडिनॉइड भी, कौन सी तकनीक इस्तेमाल हो रही है, और अस्पताल में कितना समय रुकना है। जांच के बाद लिखित अनुमान दिया जाता है। आयुष्मान कार्ड होने पर पात्रता के अनुसार योजना में कवर मिल सकता है।

क्या सर्जरी के बाद संक्रमण दोबारा हो सकता है?

टॉन्सिल निकल जाने के बाद टॉन्सिल का संक्रमण नहीं होता। गले में सामान्य सर्दी जुकाम या खराश फिर भी हो सकती है, लेकिन वह पहले जैसी गंभीर और बार बार नहीं होती।

क्या खर्राटे सिर्फ टॉन्सिल से आते हैं?

नहीं। एडिनॉइड, नाक की एलर्जी, टेढ़ा सेप्टम और मोटापा भी खर्राटों का कारण बनते हैं। इसीलिए जांच में नाक और गला दोनों देखे जाते हैं।

क्या ऑनलाइन सलाह ली जा सकती है?

हां, शुरुआती सलाह और फॉलो-अप के लिए ऑनलाइन कंसल्टेशन उपलब्ध है। लेकिन गले और नाक की जांच के लिए अस्पताल आना जरूरी होता है।

सत्कृति हॉस्पिटल में अपॉइंटमेंट लें

अगर आपके बच्चे का गला साल में कई बार खराब होता है, या वह रात में तेज खर्राटे लेता है और मुंह खोलकर सोता है, तो एक जांच करा लेना समझदारी है। जांच से यह साफ हो जाएगा कि दवा से काम चलेगा, इंतजार करना है, या सर्जरी की जरूरत है।

डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, डॉ. अंकित ओझा और डॉ. अभिनीत जैन सत्कृति हॉस्पिटल में बच्चों और बड़ों के ENT मरीज देखते हैं।

पता: संकट मोचन रोड, साकेत नगर कॉलोनी, लंका, वाराणसी 221005

OPD समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10:00 से शाम 7:00 बजे तक

फोन: 087658 48001

अपॉइंटमेंट: satkritihospital.com/appointment.php

आते समय बच्चे की पुरानी पर्चियां, दवाओं की सूची और बुखार का रिकॉर्ड साथ लाएं। सर्जरी की जरूरत तय करने में यही रिकॉर्ड सबसे ज्यादा काम आता है।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। इलाज का फैसला बच्चे की जांच के बाद ही लिया जाता है।

By satkriti-admin

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